मनोविज्ञान विषय को एप्लाइड रूप देना होगा : प्रो. मिश्रा

मनोविज्ञान विषय को एप्लाइड रूप देना होगा : प्रो. मिश्रा

जागरण संवाददाता, रोहतक : सामुदायिक स्वास्थ्य की स्थिति को बेहतर बनाने लिए मदवि के मनोविज्ञान विभाग में शनिवार को ओजोन दिवस पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला अध्ययन, शोध तथा फील्ड स्टडीज का समागम रही।

कार्यशाला के शुभारंभ सत्र में मुख्य भाषण देते हुए मनोवैज्ञानिक प्रो. गिरीश्वर मिश्रा ने कहा कि मनोविज्ञान विषय को एप्लाइड रूप देना होगा। उनका कहना था कि मनोवैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग समुदाय एवं समाज के हित में किया जाना चाहिए। इस अवसर पर प्रो. जीपी ठाकुर ने कहा कि मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों को प्रायोगिक रूप देते हुए जन-मानस के स्वास्थ्य के पहलुओं पर ध्यान देना होगा। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में विभागाध्यक्ष प्रो. प्रोमिला बतरा ने कहा कि यह कार्यशाला क्रियात्मक शोध के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य मनोविज्ञान क्षेत्र में सांझी रणनीति विकसित करने के लिए क्रियात्मक शोध महत्वपूर्ण है। मनोविज्ञान विभाग के प्रो. व यूजीसी डीआरएस-टू के समंवयक डॉ. राजबीर सिंह ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मनोविज्ञान विषय का सामुदायिक महत्व है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य शिविर तथा सामुदायिक स्वास्थ्य मनोविज्ञान कार्यशाला के जरिए स्वास्थ्य चेतना जागृत करने का प्रयास किया जा रहा है। मनोविज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. नवरत्‍‌न शर्मा, प्राध्यापिका डॉ. अंजलि मलिक एवं डॉ. पूनम मिढ़ा ने कार्यशाला आयोजन में समंवय किया। सामुदायिक स्वास्थ्य मनोविज्ञान कार्यशाला के उद्घाटन उपरात सामुदायिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन माडौढी में भी किया गया। शिविर में यूजीसी स्कीम के तहत आए विजीटिंग प्रो. इंद्राणी मुखर्जी, प्रो. वेदगिरी गणेशन, प्रो. वेंकटेश, विशेषज्ञ प्रो. उर्मी नंदा विश्वास समेत अनेक मनोवैज्ञानिक, विभाग के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद थे।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर

 

Leave a Reply